
बांग्लादेश को सताने लगा है मोदी को डर

साबिर मुस्तफ़ा

एडिटर, बीबीसी बंगाली सर्विस

 बुधवार, 16 अप्रैल, 2014 को 13:30 IST तक के समाचार

    Facebook
    Twitter
    Google+
    शेयर करें
    मित्र को भेजें
    प्रिंट करें

भारतीय नेता

भारतीय आम चुनाव को पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी काफी दिलचस्पी से देखा जा रहा है. लोकतंत्र के इस महापर्व को लेकर राजधानी ढाका में कुछ ज़्यादा ही दिलचस्पी नज़र आती है.

इसकी एक सबसे बड़ी वजह भारत में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी के सरकार बनने की संभावना है.
संबंधित समाचार

    'कोई कुछ कहे, तरक्की तो हुई है गुजरात में'
    अंबेडकर न होते, मैं यहां नहीं होता: मोदी
    मोदी के तीखे और आक्रामक होते हमले

इससे जुड़ी ख़बरें
टॉपिक

    भारतीय चुनाव 2014

गुजरात में हुए 2002 के दंगों के बाद से ही मोदी का नाम बांग्लादेश में लोग जानते हैं. इन दंगों में तक़रीबन एक हज़ार लोग मारे गए थे, जिसमें ज़्यादातर मुस्लिम थे.

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी को इस दंगे के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता रहा है. हालांकि अब तक हुई किसी भी जांच ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है.

दंगों में मोदी की विवादास्पद भूमिका के बावजूद कई बांग्लादेशी ये मानते हैं कि उनके नेतृत्व में भारत में आर्थिक विकास संभव है. लेकिन इन लोगों में इस बात को लेकर चिंता है कि मोदी का जुड़ाव कट्टरवादी हिंदुत्ववादियों से है - जिनमें मुस्लिमों को लेकर नाराजगी है.

क्लिक करें (मोदी का सीना 43 इंच का)

शायद यही वजह है कि 2014 के आम चुनावों के परिणाम का यहां बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है. लेकिन कई शंकाएं भी हैं.
मोदी का डर

ढाका में प्रतिष्ठित बांग्लादेशी इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी यूनिवर्सिटी के छात्रों से बात करने के बाद बीबीसी ने पाया कि हर ओर एक तरह की आशंका का वातावरण व्याप्त है.

ज़्यादातर युवा मोदी को मुस्लिम विरोधी नेता के तौर पर देखते हैं. इन लोगों की राय में भारत के सर्वोच्च पद पर उनका बैठना मुस्लिम बहुल बांग्लादेश के लिए अच्छी ख़बर नहीं होगी.

मुसाब्बिर अहमद साकिब कहते हैं, "नरेंद्र मोदी के चुनाव को अच्छा मानने के लिए बांग्लादेशियों के पास कोई वजह नहीं है."

भारत का हमेशा से बांग्लादेश पर प्रभाव रहा है. सन 1971 में भारतीय सेना की मदद से ही बांग्लादेश पाकिस्तान से स्वतंत्र हुआ था.

लेकिन बांग्लादेश में दक्षिणपंथी राजनीति करने वाली पार्टी बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी और उनकी मुस्लिम सहयोगी दल मसलन जमात-ए-इस्लामी भारत को बांग्लादेश की अखंडता और संस्कृति के लिए ख़तरे के तौर पर पेश करने लगे हैं.

वहीं वामपंथी रूझान रखने वाली अवामी लीग और उनके वामपंथी सहयोगी दल भारत को वैश्विक मंच पर साझीदार के तौर पर देख रहे हैं, आर्थिक विकास के साझीदार के तौर पर.

लेकिन ढाका में मौजूदा बांग्लादेशी नेता इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं. सार्वजनिक तौर पर कोई भी कुछ कहने से बच रहा है. सत्तारूढ़ अवामी लीग के वरिष्ठ नेता नूह-ए-आलम कहते हैं, "लोगों का चिंतित होना स्वभाविक है क्योंकि मोदी की निगरानी में दंगे हुए थे. हम हालात पर नज़र बनाए हुए हैं."
मोदी का स्वागत?

बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी पिछले कुछ सालों में भारत में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार से काफ़ी नाराज़ रही है. पार्टी के मुताबिक कांग्रेस की उनकी चिर प्रतिद्वंदी पार्टी अवामी लीग से काफ़ी ज्यादा नज़दीकी रही है.

लेकिन बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी के नेता भी कांग्रेस की हार और मोदी की जीत पर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं.

बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया के सलाहकार ओस्मान फ़ारुक कहते हैं कि भारत में जो भी प्रधानमंत्री चुना जाए, पार्टी उनका स्वागत करेगी.

क्लिक करें (गुजरात मॉडल का सच)